कभी पंछियों से पूछना
गिरना क्या होता है
तेज हवाओं में कभी
उड़ना क्या होता है
हवा भी रोक सके ना उसे
ऐसा होसला क्या होता है

कभी पेड़ से पूछना
अचल रेहाना क्या होता है

वो धरती हिन्दुस्थान हैं
जिसकी पैरो में समंदर
रोज जलाभिषेक करते हैं

वो धरती हिन्दुस्थान है
जिसका मस्तिष्क हमेशा
आकाश भी चुमते है

जळाव ते शरीर दुखाच्या आगीत
मरणाची सुद्धा नसावी भीती
पिशाच्च बनावं स्वार्थी दुनियेत
माणुस म्हणुन नसावी सक्ती
पडावा विसर त्या विधात्याला

असत्य से सत्य तक
पाप से पुण्य तक
राह जो दिखायें
वह गुरु कहलाये

स्वार्थ से निस्वार्थ तक
गर्व से नम्रता तक
शिष्य जो बनाये
वह गुरु कहलाये