गुरु

असत्य से सत्य तक
पाप से पुण्य तक
राह जो दिखायें
वह गुरु कहलाये

स्वार्थ से निस्वार्थ तक
गर्व से नम्रता तक
शिष्य जो बनाये
वह गुरु कहलाये

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