यही तो शुरवात है अनजान होने की
आज आप busy हो जाओ
कल हम खों जाएंगे

बस यादें रेह जाएंगी
फिर number भी बदल जाएंगे
और दोस्ती मै हम
Out of reach हो जाएंगे

बस यही तो शुरवात है
आज बाते ख़तम होने की
रूठे अब तो फिर ना मनानेकी
हम बुलाएं और आप ना आनेकी

है यहीं शुरुवात
रिश्तों के टूटने की
दोस्ती अपनी कहीं खोने की
और मिलकर भी न मिलने की

यहीं तो शुरुवात है।।

-योगेश खजानदार

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