हिंदी कविता

कभी कभी यूहीं ।।

कभी कभी तुम यूहीं
जिंदगी से बाते किया करो
क्या पता पुरानी यादों मै कहीं
अपनासा कोई मिल जाए

कभी यूहीं बैठे बैठे
दिल की धुन सुना करो

किताबों में

आखरी पन्ने पर वही
तुमसे मिलना जो था
इसी लिए तो सारी
किताब मैंने पढ़ी है

कहीं अकेला में था
कभीं यादों में तुम मेरे थे

भारतमाता

वो धरती हिन्दुस्थान हैं
जिसकी पैरो में समंदर
रोज जलाभिषेक करते हैं

वो धरती हिन्दुस्थान है
जिसका मस्तिष्क हमेशा
आकाश भी चुमते है

भारत देश है मेरा!!!

येसा देश है मेरा!!

हा यही तिरंगा है मेरा
भारत देश है मेरा
कणकण में बसता है
विभिन्नतओ का देश है मेरा

सम्मान है मेरा
भाषाओं में अनेक है देश मेरा
भिरभी जो एक है ऐसा
जग में महान है देश मेरा

रात.. !!

ये चांद कुछ कहता है
गहरी इस रात को
कही तु उसे सुन ना लेना

कही है दर्द की वजह
तो कहीं है प्यार की बातें
कही तु उसे पढ ना लेना

Scroll Up

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

कथा कविता आणि बरंच काही!! will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.