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किताबों में

“आखरी पन्ने पर वही
तुमसे मिलना जो था
इसी लिए तो सारी
किताब मैंने पढ़ी है

कहीं अकेला में था
कभीं यादों में तुम मेरे थे
रास्तों की बाते ही कुछ ऐसी के
मंज़िले तुम्हिसे मिली है

कुछ कहता यू था
कहीं गुमसुम रेहता मै था
दिल की बाते यू मेने
तुमसे कभी ना कहीं है

कहीं मुस्कुराया मै ऐसे
वजह तुम ही हो जैसे
कहीं आसु जो आये तो
रात यादों में खोई है

इंतेजार यू था की
तुमसे मिलना जो था
इसी लिए तोह सारी
किताब मैंने पढ़ी है!!”

-योगेश खजानदार

Yogesh khajandar

लेखक

21 thoughts to “किताबों में”

  1. Thank you for the follow Yogesh! I understand very little Hindi but I am sure you have a beautiful pen. I am also baffled by the awesome pictures you use to illustrate your poetry.
    Thank you once more.
    Happy and poetic start of the week to us.

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