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एक बात

“एक बात छुपी है दिल में
दर्द की चादर ओढे
कुछ शिकायतें हैं उसे
कोई तो आ के कहे
ये सन्नाटे की रात
हर तरह से बढे
गहरे अंधेरो में मुझे
कोई यु ही ना छोडे
वो लफ्ज है ठहरे
रोशनी की राह देखे
केह दो उने की
दर्द से नाता जोडे
सुबह का इंतजार किसे
जो अपना ही भूले
वो प्यार ही गुमशुदा
जिसमें अपना ही न मिले
फिर क्यूँ है ये दर्द
हर आसुओं में दिखे
कैसे सहे ये जख्म
कोई तो आ के कहे”

✍️ योगेश

Yogesh khajandar

लेखक

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