कथा कविता

“हे ईश्वर पता है मुझे
आज तु रोता होगा
इन्सानियत बिक गई
खुदसे तु केहता होगा

तेरा वजुद बट गया
सब यहा झुट होगा
किस दर पे जाऊ
तु जहा रेहता होगा

हे ईश्वर पता है मुझे
आज तु रोता होगा!!”

-योगेश खजानदार

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