वो धरती हिन्दुस्थान हैं
जिसकी पैरो में समंदर
रोज जलाभिषेक करते हैं

वो धरती हिन्दुस्थान है
जिसका मस्तिष्क हमेशा
आकाश भी चुमते है

वो धरती हिन्दुस्थान है
जिसकी रग रग में
अपनेपन की भावना पलती है

वो धरती हिन्दुस्थान है
जहा हर एक के मन में
इस मां की ममता पनपती हैं

वो धरती हिन्दुस्थान है
जो वीरों को याद करती
जिनके शौर्य से ये सजी हैं

वो धरती हिन्दुस्थान है
जो अनेकता मे दिखती
पर एक ही मन में बसी है

वो धरती हिन्दुस्थान है
जो गुलामी के जंजीर तोड
स्वतंत्रता में चली है

वो धरती हिन्दुस्थान है
जिसके लिये कितना भी लिखु
वो कलम भी कम पडती है

-योगेश खजानदार

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