"कभी पंछियों से पूछना
 गिरना क्या होता है!!
 तेज हवाओं में कभी
 उड़ना क्या होता है!!
 हवा भी रोक सके ना उसे
 ऐसा होसला क्या होता है!!

कभी पेड़ से पूछना
 अचल रेहाना क्या होता है!!
 तूफान से लड़कर भी
 जीना क्या होता है!!
 तेज धूप में जलकर भी
 छाव देना क्या होता है!!

कभी नदी से पूछना
 बेहना क्या होता है!!
 हर एक को अपने दिल मै
 समाना क्या होता है!!
 कितनी भी आए मुश्किलें
 समंदर से मिलना क्या होता है!!

कभी सूरज से पूछना
 जीवन क्या होता है!!
 दूसरों के लिए सदा ही
 जीना क्या होता है!!
 अपनों के ख़ुशी के लिए
 खुद्को जलाना क्या होता है!!

कभी पूछना तुम अपने आप से
 सांसों का मतलब क्या होता है!!"

 -योगेश खजानदार

*ALL RIGHTS RESERVED*

READ MORE

हुरडा पार्टी || Hurada Party ||

शेतात जाऊन मस्त हुरडा पार्टी करण्याची मजाच काही वेगळी असते. त्यानिमित्त रानात फिरणं होत आणि कित्येक …
Read More

मार्ग || MARG MARATHI KAVITA ||

शोधावी ती माणसं जी स्वप्नांशी झुंजत असतात झोपलेल्या उगाच पाहत वेळ वाया घालवू नये…
Read More

कपाट (मनाचं) || KAPAT MARATHI KAVITA||

‘मनाचं कपाट अगदी आठवणींनी भरून गेलं !! त्यात एवढ्या आठवणी झाल्या की, कधी कोणती आठवण भेट देईल सांगता …
Read More

निषेध .!! पण कशाचा ???

एक पुतळा फुटला !! आणि अचानक मनातलं बोलला …! निषेध ..!!! पण कसला ?? पुतळा फुटला म्हणून !! अरे !! प…
Read More

Comments are closed.

Scroll Up